श्रीमन्नारायण के द्वादश नामों का महत्व
- केशवाय नम: – क्लेश को मिटानेवाले
- नारायणाय नम: – सब कुछ स्वयं भगवान में विद्यमान है, तथा स्वयं भगवान सभी में विद्यमान है
- माधवाय नम:- देवी महालक्ष्मी के स्वामी
- गोविन्दाय नम: – अपनी वाक कला से जीतने वाले, गौओं के संरक्षक तथा संपूर्ण पृथ्वी के स्वामी
- विष्णवे नम: – सर्वत्र व्याप्त
- मधुसूदनाय नम: – हमारे विरोधियों को परास्त करने वाले, हम में पाये जाने वाले विरोधी अवगुण जैसे – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मात्सर्य, अहंकार आदि को मिटाने वाले
- त्रिविक्रमाय नम: – सभी लोक मेरे हैं, इसे बताने के निमित्त आकाश, पृथ्वी और पाताल, सभी को नापने वाले
- वामनाय नम: – अपने श्री विग्रह की सुन्दरता से सभी को अपने प्रति आकर्षित करने वाले
- श्रीधराय नम: – भगवान को जीव आसानी से प्राप्त करे, देवी महालक्ष्मी जी को अपने वक्षःस्थल पर सदा धारण करने वाले
- ऋषीकेशाय नम:- हमारी इन्द्रियों को वश में करा देने वाले, हमारे मन को भटकने से रोकने वाले
- पद्मनाभाय नम:- हम सबके कारक । जगत सृष्टि को रचने वाले, सृष्टी कर्ता ब्रह्मा को अपने नाभि कमल से जन्म देने वाले
- दामोदराय नम:- भगवान का यह नाम, परत्व का ही नहीं, सौलभ्यता को भी धारण करने वाले को कहते हैं। जगत के कारक होकर भी, अपनी माता यशोदा से रस्सी से बध जाने वाले
जय श्री मन्नारायण जो व्यक्ति द्वादश नामों का नित्य स्मरण करता है उसका सारा दुख दूर हो जाता है























