Shri Premanand Ji Maharaj Ka Jeevan Parichay

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Shri Radha Rani Ji Sarkar Keli Kunj Vrindavan
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श्री प्रेमानंद जी महाराज का जीवन परिचय

नाम: पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज
जन्म: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक स्थित अखरी गांव
मूल स्थान: व्रजभूमि, मथुरा-वृंदावन क्षेत्र

जन्म और पारिवारिक परिवेश

पूज्य महाराज जी का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक के अखरी गांव में एक अत्यंत सात्विक ब्राह्मण (पांडे) परिवार में हुआ था। उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे रखा गया।

उनका परिवार केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी समृद्ध था। उनके पितामह एक सन्यासी थे और घर का वातावरण इतना भक्तिमय और शांत था कि उसमें प्रवेश करते ही आत्मा को विश्रांति मिलने लगती थी। उनके पिता श्री शंभू पांडे, जिन्होंने आगे चलकर स्वयं भी सन्यास को स्वीकार किया, एक गहरे धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे। उनकी माता श्रीमती रमा देवी संतों के प्रति विशेष श्रद्धा रखती थीं और भक्ति कार्यों में पूर्णत: समर्पित थीं।

Param Pujya Shri Premanand Ji Maharaj
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उनके बड़े भाई श्रीमद्भागवतम के श्लोकों का पाठ करते थे, जिसे पूरा परिवार नियमित रूप से प्रेमपूर्वक सुनता और उसमें डूब जाता। इस प्रकार, पूरे परिवार का वातावरण ही जैसे एक जीवित आश्रम बन गया था, और इसी ने महाराज जी के अंतर्मन में छिपी आध्यात्मिक चिंगारी को भड़का दिया।

बचपन में भक्ति की शुरुआत

छोटी सी उम्र में ही महाराज जी का झुकाव भक्ति की ओर स्पष्ट रूप से दिखने लगा था। उन्होंने प्रार्थनाएँ, चालीसा और भजन का पाठ आरंभ कर दिया था। जब वे केवल पाँचवीं कक्षा में थे, तब उन्होंने गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित ‘श्री सुखसागर’ का नियमित पाठ प्रारंभ कर दिया।

उनका मन बाल्यकाल से ही उन विषयों में लगने लगा था, जो सामान्यतः जीवन के उत्तरार्ध में सोचे जाते हैं। “क्या माता-पिता का प्रेम स्थायी है?”, “यदि नहीं, तो अस्थायी सुख में क्यों उलझें?” जैसे गहन प्रश्नों ने उनके बालमन को आंदोलित कर दिया।

Shri Radha Krishna Sarkar Ji Darshan Keli Kunj Vrindavan
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वे सोचते थे, विद्यालय की शिक्षा और भौतिक ज्ञान किस प्रकार उनके जीवन के अंतिम उद्देश्य की पूर्ति में सहायक होंगे? यही विचार उन्हें राम और कृष्ण नाम के जाप की ओर ले गए। उन्होंने ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ और ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’ का नियमित जप शुरू कर दिया।

बाल संन्यासी बनने की ओर

जब वे नवमी कक्षा में पहुँचे, तब तक उनके भीतर भक्ति की ज्वाला पूर्ण रूप से जागृत हो चुकी थी। अब उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य तय कर लिया था — ईश्वर की प्राप्ति

मात्र तेरह वर्ष की कोमल उम्र में उन्होंने अपनी माता जी को अपने संकल्प के बारे में बताया। और फिर एक दिन — जब संसार सो रहा था, उस प्रातः 3 बजे, पूज्य महाराज जी अपने घर से निकल पड़े।

Param Pujya Shri Premanand Ji Maharaj
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पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज के उपदेश और प्रवचन

पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज के उपदेश केवल वाणी नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों से निकलने वाले अनुभूत सत्य होते हैं। उनका हर प्रवचन श्रोताओं के हृदय को छू जाता है और भक्ति, प्रेम, वैराग्य तथा ईश्वर की ओर आकर्षित कर देता है। वे कहते हैं –

“ईश्वर को पाना है तो मन को निर्मल और प्रेममय बनाओ।”

उनकी वाणी में श्रीराधा-कृष्ण की लीलाओं का रस ऐसा बहता है कि श्रोता भावविभोर हो जाते हैं। वे बताते हैं कि सांसारिक सुख क्षणिक हैं, जबकि सच्चा सुख केवल भगवद्भक्ति में ही मिलता है। उनके प्रमुख उपदेशों में शामिल हैं

Param Pujya Shri Premanand Ji Maharaj
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  • नामजप की महिमा
  • संत सेवा का महत्व
  • वैराग्य और व्रजवास की आवश्यकता
  • राधा नाम की अद्वितीयता

महाराज जी का यह संदेश सदा प्रेरणा देता है

“श्रीराधा नाम ही ब्रह्म है, वही आनंद है।”

उनके प्रवचन जीवन को प्रेम, सेवा और समर्पण की दिशा में मोड़ देते हैं।

पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज का विरक्त जीवन

पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज का जीवन पूर्णतः विरक्त, सादगीपूर्ण और ईश्वरमय रहा। उन्होंने बचपन में ही सांसारिक मोह-माया से विमुख होकर ईश्वर की प्राप्ति को ही जीवन का लक्ष्य बना लिया। वे सदा व्रज की रज में लीन रहते, राधा नाम का जप करते और संत सेवा में जीवन समर्पित रखते थे। वस्त्र, आभूषण, सम्मान — सब कुछ त्याग कर उन्होंने प्रेम, भक्ति और वैराग्य को अपनाया। उनका निर्मल और त्यागमय जीवन आज भी लाखों साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

महाराज जी की मुख्य विशेषताएँ

  • उन्होंने जीवन भर किसी संस्था, आश्रम या प्रचार-प्रसार का सहारा नहीं लिया।
  • वे सादगी, त्याग और पूर्ण वैराग्य के प्रतीक हैं।
  • उनका संपूर्ण जीवन श्रीराधा नाम के जप, ब्रजभूमि की सेवा और साधना में समर्पित रहा।
  • श्रीराधा-कृष्ण की लीला का सजीव वर्णन उनकी वाणी में देखने को मिलता है।

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