Mandir Se Lautte Samay Kyon Nahi Bajai Jaati Ghanti? Jaaniye Shaastron Mein Kya Likha Hai

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Mandir Se Lautte Samay Kyon Nahi Bajai Jaati Ghanti
Mandir Se Lautte Samay Kyon Nahi Bajai Jaati Ghanti

मंदिर से लौटते समय क्यों नहीं बजाई जाती घंटी? जानिए शास्त्रों में क्या लिखा है

हिंदू मंदिरों में प्रवेश करते समय घंटी बजाने की परंपरा बहुत पुरानी है। लगभग हर मंदिर के द्वार पर घंटी लगी होती है और भक्त दर्शन से पहले उसे बजाते हैं। लेकिन एक बात आपने शायद नोटिस की होगी—मंदिर से बाहर निकलते समय ज्यादातर लोग घंटी नहीं बजाते। आखिर ऐसा क्यों? आइए इसे शास्त्र और परंपरा के आधार पर समझते हैं।

मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी क्यों बजाते हैं?

मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी बजाने के पीछे आध्यात्मिक और धार्मिक कारण बताए गए हैं।

  • घंटी की ध्वनि से मन एकाग्र होता है और पूजा के लिए मन तैयार हो जाता है।
  • यह भगवान को अपने आगमन का संकेत देने का प्रतीक माना जाता है।
  • माना जाता है कि इसकी आवाज से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण पवित्र हो जाता है।

इस बारे में स्कंद पुराण में एक प्रसिद्ध श्लोक मिलता है:

आगमार्थं तु देवानां गमनार्थं तु रक्षसाम्।
कुरु घंटारवं तत्र देवताह्वान लक्षणम्॥

अर्थ: घंटी की ध्वनि देवताओं को बुलाने और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने का संकेत मानी जाती है।

मंदिर से लौटते समय घंटी क्यों नहीं बजाते?

शास्त्रों में सीधे-सीधे यह नहीं लिखा कि लौटते समय घंटी बजाना मना है, लेकिन मंदिरों की परंपरा और आचार में इसे नहीं बजाया जाता। इसके पीछे कुछ कारण बताए जाते हैं:

भगवान का आह्वान प्रवेश के समय होता है

घंटी की ध्वनि को देवताओं के आह्वान का प्रतीक माना गया है। इसलिए जब भक्त मंदिर में प्रवेश करता है तभी घंटी बजाता है।

दर्शन के बाद शांति बनाए रखना

भगवान के दर्शन करने के बाद भक्त को शांत मन से बाहर निकलना चाहिए ताकि भक्ति और ध्यान की भावना बनी रहे।

भगवान को विदा नहीं किया जाता

घंटी बजाना आगमन का संकेत माना जाता है, इसलिए जाते समय इसे नहीं बजाया जाता।

शास्त्रों में घंटी का महत्व

घंटी की महिमा कई अन्य ग्रंथों में भी बताई गई है।

अग्नि पुराण

घंटानादं प्रकुर्वीत सर्ववाद्यमयीं शुभाम्।
देवताप्रीतिकार्यर्थं पापनाशनकारणम्॥

अर्थ: घंटी की ध्वनि शुभ मानी गई है, इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और पापों का नाश होता है।

पद्म पुराण

घंटानादेन देवेशः प्रीयते नात्र संशयः।
तस्मात् सर्वप्रयत्नेन घंटां नादयेत् नरः॥

अर्थ: घंटी की ध्वनि से भगवान प्रसन्न होते हैं, इसलिए श्रद्धा से घंटी बजानी चाहिए।

नारद पुराण

इनमें भी बताया गया है कि घंटी की आवाज से देवता प्रसन्न होते हैं और नकारात्मक शक्तियाँ दूर हो जाती हैं।

आगम शास्त्रों की परंपरा

मंदिरों की पूजा पद्धति अधिकतर आगम शास्त्रों पर आधारित होती है, जैसे

  • कामिक आगम

इन ग्रंथों में पूजा के समय घंटी बजाने का उल्लेख मिलता है, जिससे वातावरण पवित्र और मन एकाग्र हो जाता है।

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