Shirmad Bhagavad Gita

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Shrimad Bhagavad Gita Chapter-18 (Part-18) in Hindi.mp3

March 5th, 2017|


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भागवत गीता भाग १८ सारांश / निष्कर्ष :- संन्यास योग

यह गीता का समापन अध्याय है आरम्भ में ही अर्जुन का प्रश्न है प्रभो! मैं त्याग और संन्यास के भेद और स्वरूप को जानना चाहता हूँ। योगेश्वर श्रीकृष्ण ने इस पर प्रचलित चार मतों की चर्चा की। इनमे एक सही भी था। इससे […]

Shirmad Bhagavad Gita Chapter-17 (Part-17) in Hindi.mp3

March 5th, 2017|


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भागवत गीता भाग १७ सारांश / निष्कर्ष :- ॐतत्सत् व श्रद्धात्रय विभाग योग

अध्याय के आरम्भ में ही अर्जुन ने प्रश्न किया कि भगवन! जो शास्त्रविधि को त्याग कर और श्रद्धा से युक्त होकर यजन करते है ( लोग भुत, भवानी अन्यान्य पूजते ही रहते है) तो उनकी श्रद्धा कैसी है? सात्त्विकी है, […]

Shirmad Bhagavad Gita Chapter-16 (Part-16) in Hindi.mp3

March 5th, 2017|


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भागवत गीता भाग १६ सारांश / निष्कर्ष :- दैवासुर सम्पद् विभाग योग

इस अध्याय के आरम्भ में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने दैवी सम्पद का विस्तार से वर्णन किया। जिसमें ध्यान में स्थिति, सर्वस्व का समर्पण, अन्त: करण की शुद्धि इन्द्रियों का दमन, मन का समन, स्वरूप को स्मरण दिलाने वाला अध्ययन, यज्ञ के लिये […]

Shirmad Bhagavad Gita Chapter-15 (Part-15) in Hindi.mp3

March 5th, 2017|


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भागवत गीता भाग १५ सारांश / निष्कर्ष :- पुरुषोत्तम योग
इस अध्याय के आरम्भ में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने बताया कि संसार एक वृक्ष है, पीपल जैसा वृक्ष है। पीपल एक उदहारण मात्र है। ऊपर इसका मूल परमात्मा और नीचे प्रकृतिपर्यन्त इसकी शाखा-प्रशाखाएँ है। जो इस वृक्ष को मूल सहित विदित कर देता है, […]

Shirmad Bhagavad Gita Chapter-14 (Part-14) in Hindi.mp3

March 5th, 2017|


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प्रक्रति से ही उत्पन्न हुए रज, सत्त्व और तम तीनो गुण ही इस जीवात्मा को शरीर में बांधते है। दो गुणों को दवाकर तीसरा गुण बढाया जा सकता है। गुण परिवर्तनशील है। प्रक्रति जो अनादि है, नष्ट नहीं होती, बल्कि गुणों का प्रभाव टाला जा सकता है गुण मन पर प्रभाव डालते […]

Shirmad Bhagavad Gita Chapter-13 (Part-13) in Hindi.mp3

March 5th, 2017|


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भागवत गीता भाग १३ सारांश / निष्कर्ष :- क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग

गीता के आरम्भ में धर्मक्षेत्र, कुरुक्षेत्र का नाम तो लिया गया, किन्तु वह क्षेत्र वस्तुत: है कहा? वह स्थल बताना शेष था, जिसे स्वयं शास्त्रकार ने प्रस्तुत अध्याय में स्पष्ट किया। कौन्तेय! यह शरीर ही एक क्षेत्र है। जो इसको जनता है, […]

Shirmad Bhagavad Gita Chapter-12 (Part-12) in Hindi.mp3

March 5th, 2017|


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भागवत गीता भाग १२ सारांश / निष्कर्ष :- भक्तियोग
गत अध्याय के अन्त में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने कहा कि- अर्जुन! तेरे सिवाय न कोई पाया है, न कोई पा सकेगा। जैसा तू ने देखा, किन्तु अनन्य भक्ति अथवा अनुराग से जो भजता है, वह इसी प्रकार मुझे देख सकता है, तत्व के साथ […]

Shirmad Bhagavad Gita Chapter-11 (Part-11) in Hindi.mp3

March 5th, 2017|


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भागवत गीता भाग ११ सारांश / निष्कर्ष :- विश्वरूप-दर्शन योग
इस अध्याय के आरम्भ में अर्जुन ने कहा – भगवन! आपकी विभूतियों को मैंने विस्तार से सुना, जिससे मेरा मोह नष्ट हो गया, अज्ञान का शमन हो गया, किन्तु जैसा आपने बताया कि मैं सर्वत्र हूँ, इसे मैं प्रत्यक्ष देखना चाहता हूँ। यदि […]

Shirmad Bhagavad Gita Chapter-10 (Part-10) in Hindi.mp3

March 5th, 2017|


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भागवत गीता भाग १० सारांश / निष्कर्ष :- विभूति-वर्णन

इस अध्याय में श्रीकृष्ण ने कहा कि – अर्जुन! मैं तुझे पुनः उपदेश करूँगा, क्योकि तू मेरा अतिशय प्रिय है। पहले कह चुके है, फिर भी कहने जा रहे है, क्योकि पूर्तिपर्यन्त सदगुरु से सुनने की आवश्यकता रहती है। मेरी उत्पति को न देवता और […]

Shirmad Bhagavad Gita Chapter-09 (Part-09) in Hindi.mp3

March 5th, 2017|


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भागवत गीता भाग ९ सारांश / निष्कर्ष :- राजविद्या-जागृति
इस अध्याय के आरम्भ मै श्रीकृष्ण ने कहा – अर्जुन! तुझ दोषरहित भक्त के लिये मैं इस ज्ञान को विज्ञानं सहित कहूँगा, जिसे जानकर कुछ भी जानना शेष नहीं रहेगा। इसे जानकर तू संसार बंधन से छुट जायेगा। यह ज्ञान सम्पूर्ण विधियाओ का राजा […]