माँ चामुण्डा जी

अजगर को मुक्ति देने के बाद श्री कृष्ण ने किए थे माँ चामुण्डा के दर्शन

51 शक्तिपीठों में से प्रधान शक्तिपीठ बताई जाने वाली माँ चामुण्डा का मंदिर मथुरा-वृन्दावन मार्ग पर स्थित माँ गायत्री तपोभूमि के सामने बना हुआ है। यह स्थान वह स्थान बताया जाता है। जहा माँ भगवती जगदम्बा के केश गिरे थे। इस मंदिर का वर्णन श्रीमद्भागवत में भी सुनने को मिलता है।  बताते है की सतयुग के इस मंदिर मे श्री कृष्ण ने अजगर को मुक्ति देने के बाद माँ चामुंडा के दर्शन किये थे। यह मंदिर शांडिल्य ऋषि की तपस्थली भी बताई जाती है। कहते है की गुरु गोरखनाथ ने इस मंदिर में सिद्धि प्राप्त की थी। इस मंदिर में विराजमान मां चामुण्डा नन्द बाबा की कुल देवी बताई जाती है। कहते है की नंद बाबा ने ग्वाल-बालों के साथ मिलकर सरस्वती कुंड पर श्री कृष्ण का मुंडन कराने के बाद इसी चामुंडा माँ की जात लगाई थी। नवरात्रि के दिनों में यह श्रद्धालु दर्शन करने के लिए दूर दराज से आते है। प्रत्येक रविवार को व नवरात्र की अष्टमी व नवमी के दिन यहा श्रध्दालुओ का जमावड़ा लगा रहता है। अक्षय नवमी व देवोत्थान एकादशी पर्व पर भी यहाँ भारी मात्रा में श्रध्दालु दर्शन करते है। क्योंकि इन दिनों लगने वाली मथुरा व तीनों वन की परिक्रमा में पढने वाले सभी मंदिर का महत्व बताया जाता है। खास बात यह है कि इस मंदिर में माँ चामुण्डा की कोई भी प्रतिमा स्थापित नही है बल्कि वह स्वयं उत्पन हुई है।

maa-chamunda-yagay-shrimathuraji

Find Maa Chamunda Devi Temple Through Google Map