2101, 2017

Kaise Hua Hanumaan Jee Ka Janum

कैसे हुआ हनुमान जी का जन्म

पुराणों की कथानुसार हनुमान की माता अंजना संतान सुख से वंचित थी। कई जतन करने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इस दुःख से पीड़ित अंजना मतंग ऋषि के पास गईं, तब मंतग ऋषि ने उनसे कहा-पप्पा सरोवर के पूर्व में एक नरसिंहा आश्रम है, उसकी दक्षिण दिशा में नारायण पर्वत पर स्वामी तीर्थ है वहां जाकर उसमें स्नान करके, बारह वर्ष तक […]

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2101, 2017

Man Maakhan Kaise Ho Krishna Leela Maadhury

मन माखन कैसे हो कृष्णा लीला माधुर्य

ऐसा क्या था गोपियों के पास कि कृष्ण स्वयं बिना बुलाए,उनके मन का काम (गोपियाँ चाहती थी कि हमारे घर आकर चोरी करे )कर देते थे। वास्तव में देखा जाए तो गोपियों ने अपने चित्त को माखन बनाया था,और उनके चित्त रूपी माखन को ही भगवान चुराते थे। सबसे पहले जानते है कि माखन बनता कैसे है। ये जानना अति आवश्यक हे सबसे पहले […]

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2101, 2017

Maharshi Vashishth Ka Krodh

महर्षि वशिष्ठ का क्रोध

एक बार आप, ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभाष आदि अष्ट वसु अपनी पत्नियों के साथ महर्षि वशिष्ठ के आश्रम के समीप घूम रहे थे। प्रभाष की पत्नी की नजर आश्रम में कामधेनु गाय पर पड़ी, वह कामधेनु को देखकर ललचा गईं। उन्होंने अपने पति से कहा कि आप स्वयं वसु है, ऐसी दिव्य गाय का किसी मुनि के पास क्या काम, मुझे यह गाय […]

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2101, 2017

Mahaadev Ke Kotavaal Hain Bhairavanaath

महादेव के कोतवाल हैं भैरवनाथ

बाबा विश्वनाथ देवाधिदेव महादेव हैं, तो भैरवनाथ उनके सबसे प्रिय अनुचर हैं। जो असंख्य शिवभक्तों और गणों की व्यवस्था संभालते हैं। बिना उनके अनुग्रह के कोई महादेव के पास भी नहीं पहुंच सकता। भैरव बाबा ही भोलेनाथ की प्रिय काशी नगरी के कोतवाल की व्यवस्था संभालते हैं। काशी में भैरवनाथ के दर्शन किए बिना बाबा विश्वनाथ के दर्शन अधूरे माने जाते हैं। भैरवनाथ भगवान शिव के […]

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2101, 2017

Eeshvar Hamaare Ho Gae To

ईश्वर हमारे हो गए तो

एक नगर के राजा ने यह घोषणा करवा दी कि कल जब मेरे महल का मुख्य दरवाज़ा खोला जायेगा। तब जिस व्यक्ति ने जिस वस्तु को हाथ लगा दिया वह वस्तु उसकी हो जाएगी। इस घोषणा को सुनकर सब लोग आपस में बातचीत करने लगे कि मैं अमुक वस्तु को हाथ लगाऊंगा। कुछ लोग कहने लगे मैं तो स्वर्ण को हाथ लगाऊंगा, कुछ लोग कहने लगे […]

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2101, 2017

Pyaar Ka Anand

प्यार का आनन्द

एक तितली मायूस सी बैठी हुई थी। पास ही से एक और तितली उड़ती हुई आई। उसे उदास देखकर रुक गई और बोली – क्या हुआ ? उदास क्यों इतनी लग रही हो ?
वह बोली – मैं एक फूल के पास रोज जाती थी। हमारी आपस में बहुत दोस्ती थी। बड़ा प्रेम था। पर अब उसके पास समय ही नहीं है मेरे लिए। वह तो बहुत व्यस्त […]

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2101, 2017

Sau Oonto Kee Kahaanee

सौ ऊंटो की कहानी

किसी शहर में, एक आदमी प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था। वो अपनी ज़िन्दगी से खुश नहीं था , हर समय वो किसी न किसी समस्या से परेशान रहता था। एक बार शहर से कुछ दूरी पर एक महात्मा का काफिला रुका . शहर में चारों और उन्ही की चर्चा थी। बहुत से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुँचने लगे , उस आदमी ने भी महात्मा […]

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2101, 2017

Peepal Ke Vrksh Kee Atyant Mahatv Kyon

पीपल के वृक्ष की अत्यंत महत्ता क्यों

सनातन धर्म मे पीपल के वृक्ष की अत्यंत महत्ता मानी गई है। पीपल की पूजा का महत्व अधि‍क होने के पीछे कई कारण हैं। आध्यात्मि‍क रूप से देखें, तो इसे वृक्षों मे सबसे अधिक पवित्र माना गया है। साथ ही पर्यावरण मित्र की भूमिका भी निभाता है। पीपल मे पित्रों का वास भी माना गया है। गीता मे भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं –

‘अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणाम् […]

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2101, 2017

Prem Karate Raho Mai To Tumhe Svayan Mil Jaoonga

प्रेम करते रहो मै तो तुम्हे स्वयं मिल जाऊंगा

एक व्यक्ति बहुत नास्तिक था उसको भगवान पर विश्वास नहीं था। एक बार उसके साथदुर्घटना घटित हुई वो रोड पर पड़ा पड़ा सबकी ओर कातर निगाहों से मदद के लिए देख रहा था। पर कलियुग का इंसान – किसी इंसान की मदद जल्दी नहीं करता, मालूम नहीं क्यों, वो येही सोच कर थक गया । तभी उसके नास्तिक मन नेअनमने से प्रभु […]

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2101, 2017

Kuber Ka Ahankaar

कुबेर का अहंकार

कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, पर कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन करने की बात सोची और उसमे तीनों लोकों के सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया! भगवान शिव उनके इष्ट देवता थे। इसलिए उनका आशीर्वाद लेने वह कैलाश पहुंचे और […]

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2101, 2017

Aaj Shree Narad Ji Ke Bhakti Bhav Ke Bare Me Bhaav Rakhate Hai

आज श्री नारद जी के भक्ति भाव के बारे मे भाव रखते है

अगर वेदों शास्त्रों में पड़े तब यह जानेंगे के श्री नारदजी श्री विष्णुजी के चौबीस अवतारों में एक अवतार है परंतु यह सब तो ” लोक आदि को शिक्षा आदि देने के लिए लिख दिया ताकि नारदजी अवतारों में गिने जाए और उनका महारसिकतत्व कोई ना जान पाए क्यूँकि श्री कृष्ण प्रेम अति गोपनीय है और श्री कृष्ण […]

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2101, 2017

Achchha Kabhee Vakt Aaega To Bataoonga

अच्छा कभी वक्त आएगा तो बताऊंगा

श्री कृष्ण ने टालना चाहा, लेकिन सुदामा की जिद पर श्री कृष्ण ने कहा, “अच्छा, कभी वक्त आएगा तो बताऊंगा। और फिर एक दिन कृष्ण कहने लगे, सुदामा, आओ, गोमती में स्नान करने चलें| दोनों गोमती के तट पर गए। वस्त्र उतारे, दोनों नदी में उतरे श्रीकृष्ण स्नान करके तट पर लौट आए। पीतांबर पहनने लगे, सुदामा ने देखा, कृष्ण तो तट पर चला गया […]

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2101, 2017

Kharidari Ke Lie Ravipushyaamrt Yog Hee Kyon Khaas

खरीदारी के लिए रविपुष्यामृत योग ही क्यों खास

कल 23 अक्टूबर 2016 दिन रविवार को प्रातः 06:13 से रात्रि 01:43 बजे तक रविपुष्य योग है । इसमें किया गया जप तप दान आदि अक्षय होता है। 23 अक्टूबर 2016 रविवार को ( सूर्योदय प्रातः 06:13 बजे से रात्रि 01:43 तक ) रविपुष्यामृत योग है। बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें।

बाजार से […]

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2101, 2017

Kaartik Maas Mein 7 Niyam

कार्तिक मास में 7 नियम

पुराणों में कहा है कि भगवान नारायण ने ब्रह्मा को, ब्रह्मा ने नारद को और नारद ने महाराज पृथु को कार्तिक मास के सर्वगुण संपन्न माहात्म्य के संदर्भ में बताया है। कार्तिक मास में 7 नियम प्रधान माने गए हैं, जिन्हें करने से शुभ फल मिलते हैं और हर मनोकामना पूरी होती है। ये 7 नियम इस प्रकार हैं।

दीपदान – धर्म शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास […]

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2101, 2017

Sabse Bada Rog Kya Kahenge Log

सबसे बडा रोग, क्या कहेंगे लोग

बौद्ध भिक्षुक किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया। पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं तो तीन-चार पनिहारिनें पानी के लिए आईं तो एक पनिहारिन ने कहा, आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया। पत्थर का ही सही, लेकिन रखा तो है। पनिहारिन की बात साधु ने सुन ली। उसने तुरंत पत्थर फेंक […]

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2101, 2017

Sant Vachan

सन्त वचन

भक्त जब एकान्त में बैठता है, तब उसकी दृष्टि में एक भगवान्‌ के सिवाय कुछ नहीं होता। अतः वह भगवत्प्रेम की मादकता में डूबा रहता है। परन्तु जब वह व्यवहार करता है, तब भगवान् संसाररूप से सेव्य बनकर उसके सामने आते हैं। अतः व्यवहार में भक्त अपनी प्रत्येक क्रिया से भगवान्‌ का पूजन करता है।

स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः

पहले पूजक मुख्य होता है, फिर वह पूजा होकर पूज्य में […]

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2101, 2017

Lala Lo Laee Banaay Diya Barasaane Kee Gopinani Ne

लला को लली बनाय दियौ बरसाने की गोपिननि ने

लला को लली बनाय दियौ
बरसाने की गोपिननि ने।

इतते आई रही गोपिननि
उतते सावँरिया गोप सखा संग
जबर पकरि बैठायौ लियौ
बरसाने की गोपिननि ने।

खींच पीताम्बर, चूँदरी ओढ़ाई
बिंदी कजरा माँग सिंदूर, नकबेसर पहराई
चूड़ियाँ कंगना पायल बिछिया
घाघरा कमर में घाल दियौ
बरसाने की गोपिननि ने।

इत फुदकें, उत फुदकें सावँरिया
बच निकरन को फड़कै सावँरिया
छीन मुरलिया, सिर मटकी धरि दई
जौबना […]

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2101, 2017

Kodee Par Daya

कोड़ी पर दया

एक बार श्री गुरु नानक देव जी जगत का उद्धार करते हुए एक गाँव के बाहर पहुँचे और देखा वहाँ एक झोपड़ी बनी हुई थी। उस झोपड़े में एक आदम रहता था, जिसे कुष्ठ का रोग था। गाँव के सारे लोग उससे नफरत करते थे कोई उसके पास नहीं आता था। कभी किसी को दया आ जाती तो उसे खाने के लिए कुछ दे देते। गुरुजी उस कोढ़ी […]

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2101, 2017

Tambe Ka Sikka

तांबे का सिक्का

एक राजा का जन्मदिन था। सुबह जब वह घूमने निकला, तो उसने तय किया कि वह रास्ते मे मिलने वाले पहले व्यक्ति को पूरी तरह खुश व संतुष्ट करेगा। उसे एक भिखारी मिला। भिखारी ने राजा से भीख मांगी, तो राजा ने भिखारी की तरफ एक तांबे का सिक्का उछाल दिया। सिक्का भिखारी के हाथ से छूट कर नाली में जा गिरा। भिखारी नाली में हाथ डाल तांबे […]

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2101, 2017

Jab Shree Raadha Jee Ne Khoee Apanee Mauteesiree

जब श्री राधा जी ने खोई अपनी मौतीसिरी

श्री राधा जी अपनी सखियों के साथ जमुना-पुलिन विचरण विहार करके वापस घर लौट रही हैं,अति सहमी सहमी और उदास सी। इसका कारण है माता के रोष का भय, क्योंकि आज उन्होंने जमुना-पुलिन-वन में अपनी मोतीसिरी ( मोती और हीरो जड़ा गले का हार) खो दी है। जिनसे सारी सृष्टि भय खाती है वही अपनी माता के भय से सहम रही हैं। घर […]

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