2603, 2017

Aap Krpa Karake Mujhe Sansaar Bandhan Se Chhudao

आप कृपा करके मुझे संसार बन्धन से छुड़ाओ

किसी राजा ने संत कबीर जी से प्रार्थना की किः “आप कृपा करके मुझे संसार बन्धन से छुड़ाओ।”
कबीर जी ने कहाः “आप तो धार्मिक हो… हर रोज पंडित से कथा करवाते हो, सुनते हो…”
“हाँ महाराज ! कथा तो पंडित जी सुनाते हैं, विधि-विधान बताते हैं, लेकिन अभी तक मुझे भगवान के दर्शन नहीं हुए हैं… अपनी मुक्तता का अनुभव नहीं हुआ। आप […]

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2403, 2017

Navartri Ke Navami Din Mata Siddhidatri Roop Ki Pooja

नवरात्री के नवमी दिन माता सिद्धिदात्री रूप की पूजा

नवरात्री की नवमी दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा विधि

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि |
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ||

सिद्धिदात्री स्वरूप

नवरात्र-पूजन के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवमी के दिन सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा कर रहे हैं उन्हें नवमी के दिन इनका पूजन अवश्य करना चाहिए।

सिद्धि और मोक्ष […]

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2303, 2017

Bansuri Ki Dhun

बाँसुरी की धुन

इटली में मुसोलिनी के यहाँ भारत के प्रतिनिधि के रूप में ओंकारनाथ गये थे। मुसोलिनी ने उन्हें भोजन दिया। भोजन करते समय वार्तालाप के दौरान मुसोलिनी ने ओंकारनाथ से प्रश्न किया, “तुम्हारे भारत में ऐसा क्या है कि एक ग्वाला गायों के पीछे जाता है और बाँसुरी बजाता है तो लोग उसे देखकर आनन्दविभोर हो जाते हैं? भारत के लोग उसके गीत गाते नहीं थकते और प्रति […]

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1903, 2017

Adhura Kaam Ko Poora Karne Ke Liye Prabhu Khud Aa Jaate Hai

अधूरा काम को पूरा करने के लिए प्रभु खुद आ जाते है।

श्रीजयदेव जी भगवान श्रीकृष्ण के प्रेमी भक्त थे। आपके हृदय में श्रीकृष्ण प्रेम हिलोरें लेता रहता था। उसी प्रेम के ओत-प्रोत होकर आपने अमृत-रस के समान ‘गीत-गोविन्द’ नामक ग्रन्थ की रचना करनी प्रारम्भ की। ऐसे में एक दिन मान-प्रकरण में आप, स्वयं भगवान श्रीकृष्ण श्रीमती राधा – रानी के पैर पकड़ेंगे, इस बात को लिखने का साहस नहीं कर […]

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1603, 2017

Is Moolyavan Jeevan Ko Samajhe

इस मूल्यवान जीवन को समझे

एक हीरा व्यापारी था जो हीरे का बहुत बड़ा विशेषज्ञ माना जाता था। किन्तु गंभीर बीमारी के चलते अल्प आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी। अपने पीछे वह अपनी पत्नी और बेटा छोड़ गया। जब बेटा बड़ा हुआ तो उसकी माँ ने कहा – “बेटा , मरने से पहले तुम्हारे पिताजी ये पत्थर छोड़ गए थे , तुम इसे लेकर बाज़ार जाओ और इसकी कीमत […]

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1103, 2017

Kaliyug Mein Shravan Bhakti Ka Mahatv

कलियुग में श्रवण भक्ति का महत्व

वैसे तो रामचरितमानस में नवधा(9) भक्ति बताई गई है। लेकिन मैं आज आपको 1 श्रवण भक्ति के बारे में बताना चाहुँगी।

श्रवण का अर्थ सुनना होता है और यही भक्ती की पहली सीढ़ी भी होती है ,जब हमें ईश्वर के बारे में जानने और सुनने की जिज्ञासा हो और उनकी कथा सुनने में जब हमें आनन्द आने लगे तो समझ जाना चाहिए कि हमने भक्ती की […]

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903, 2017

Tote Ki Chonch Se Seekh

तोते की चोंच से सीख

पट्टू तोता बड़ा उदास बैठा था. माँ ने पुछा, क्या हुआ बेटा तुम इतने उदास क्यों हो? पट्टू लगभग रोते हुए बोला – मैं अपनी इस अटपटी चोंच से नफरत करता हूँ..!! माँ ने समझाने की कोशिश की तुम अपनी चोंच से नफरत क्यों करते हो..?? इतनी सुन्दर तो है..! पट्टू उदास बैठ गया. नहीं, बाकी सभी पक्षियों की चोंच कहीं अच्छी है. बिरजू बाज, कालू […]

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403, 2017

Chabi Ki Tarah Dil Aur Man Ko Chuo

चाबी की तरह दिल और मन को छुओ

किसी गाँव में एक ताले वाले की दुकान थी। ताले वाला रोजाना अनेकों चाबियाँ बनाया करता था। ताले वाले की दुकान में एक हथौड़ा भी था| वो हथौड़ा रोज देखा करता कि ये चाभी इतने मजबूत ताले को भी कितनी आसानी से खोल देती है। एक दिन हथौड़े ने चाभी से पूछा कि मैं तुमसे ज्यादा शक्तिशाली हूँ, मेरे अंदर लोहा भी तुमसे […]

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303, 2017

Ishwar Ka Koi Karya Yuhi Ya Vyarth Mein Hi Nahi Hota

ईशवर का कोई कार्य युहीं या व्यर्य में ही नहीं होता

चक्रवती भरत के जीवन की एक घटना है कि, एक दिन विप्र देव ने उनसे पूछा- महाराज आप वैरागी है तो महल में क्यों रहते हैं? आप महल में रहते हैं तो वैरागी कैसे? मोह, माया, विकार, वासना के मध्य आप किस तरह के वैरागी है? क्या आपके मन में कोई मोह, पाप, विकार और वासना के कोई भाव नही […]

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2602, 2017

Kya Hamare Kanhaiya Koi Jadu Tona Janate Hain

क्या हमारे कन्हैया कोई जादू टोना जानते हैं

“दाऊ भैया आपको ज्ञात है, क्या हमारे कन्हैया कोई जादू टोना जानते हैं। इनकी ओर सब इतने आकर्षित क्यों रहतें हैं?” कन्हैया के मित्र मनसुखा ने श्री कृष्ण को स्नेह भरी दृष्टि से निहारते हुये अति कौतुहल से पूछा। “नहीं मनसुखा जादू टोना नहीं, इस नटखट कन्हैया के पास कोई विद्या है जिससे यह सबका मन मोह लेता है”- बलराम जी ने अपने […]

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2602, 2017

Dhan Ka Vyarth Sanchay Na Karo

धन का व्यर्थ संचय न करो

किसी नगर में एक धनवान व्यक्ति रहता था। उसके पास अपार भू-सम्पति थी। परंतु वह बेहद कंजूस था। पदार्थों में सबसे कीमती पदार्थ सोना तो उसे बेहद प्रिय था। सोने की यह प्यास उसमें इतनी बढ़ी कि उसने अपनी जमीन जायदाद बेचकर सोने के सिक्के खरीद लिए। उसने सभी सोने के सिक्कों को एक संदूक में भर लिया। इसके बाद रात के अंधेरे में उसने […]

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1602, 2017

Man Ka Anand Antarik Saundary

मन का आंनद आंतरिक सौन्दर्य

एक बार इंद्र अपने दरबार में सभी देवताओं के साथ बैठे पृथ्वी की स्थिति पर चर्चा कर रहे थे। पृथ्वी के जीवन, वहां की समस्यओं व मांगों के विषय में सभी अपने अपने विचार रख रहे थे। इंद्र का आग्रह था कि पृथ्वी के जीवन के विषय में उन्हें सही विषयवस्तु का ज्ञान हो जाए तो वे सुधार की दिशा में कुछ सकारात्मक कदम उठाएं। देवताओं […]

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1002, 2017

Karma Bai Ka Prem

कर्मा बाई का प्रेम
कर्मा बाई जी कोई भी काम करते समय भगवान के नामो का उच्चारण करती रहती थी। उनका हर काम भगवान के लिए ही होता था। वे यदि कंडे भी थापती थी तो भी भगवान का गान करती रहती थी। एक बार उनके कंडे किसी ने चोरी कर लिए, ये जानकर उन्हें बड़ा दुःख हुआ। तब किसी ने कहा – हम घर घर जाकर लोगो से पूँछेगे, हम […]

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502, 2017

Moksh Ka Adhikari Kaun

मोक्ष का अधिकारी कौन

ब्रह्माजी के कुल में एक बड़े ही धर्मात्मा और दानी राजा का जन्म हुआ। उनका नाम वसु था। वसु जहां से भी सम्भव हो ज्ञान इकट्ठा करते रहते थे इसलिये अपने ज्ञान और जानकारी के लिए भी बहुत प्रसिद्ध थे। एक दिन वसु ब्रह्माजी से मिलने पहुंचे। ब्रह्माजी के भवन में देवों की सभा चल रही है। इतने में रैभ्य मुनि आ वहां गए। रैभ्य देवगुरू वृह्स्पति […]

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202, 2017

Thakur Ji Ki Kripa

ठाकुर जी की कृपा

सर्वकाल ठाकुर की मेरे ऊपर बड़ी कृपा है –

मात्र यही मन को शान्त करता है पैर मे जूता होने पर काँटे के ऊपर पैर रखने वाले को मालूम है कि मुझे तो कुछ होने वाला नही है , परंतु उससे कहा जाय फूल पर पैर रखने के लिये , तो हो सकता है वो पैर न रख सके ।

घर के लोग फूल जैसे हों – […]

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2901, 2017

Bhagavaan Ka Mitr Hona Bhee Atyant Durlabh Hai

भगवान का मित्र होना भी अत्यन्त दुर्लभ है।

सूरदासजी ने एक पद में खेल के प्रसंग का बहुत ही सुन्दर वर्णन किया है जिसमें श्रीकृष्ण हार जाते हैं और श्रीदामा जीत जाते हैं। पर श्रीकृष्ण दांव देना नहीं चाहते और खेलना भी चाहते हैं तब श्रीदामा कहते हैं कि:- खेलते समय क्यों गुस्सा करते हो, तुम हमसे जाति में तो बड़े नहीं हो न ही हम तुम्हारे घर में रहते हैं। […]

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2601, 2017

Jab Tak Vo Deta Rahega Tab Tak Main Bhee Deta Rahunga

जब तक वो देता रहेगा, तब तक मैं भी देता रहुँगा।

एक बार एक सत्संग के बाद , गुरुजी एक कतार में खड़े लोगों को प्रसाद बाँट रहे थे। एक छोटा लड़का गुरुजी तक भाग के गया और गुरुजी ने वह छोटे लड़के को प्रसाद दिया। लड़का प्रसाद लेकर भाग गया और फिर गुरुजी के पास गया और गुरुजीने उसे प्रसाद फिर से दिया। पूर्ण उत्साह के साथ, लड़का वापस गुरुजी […]

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2101, 2017

Bhajan Simaran Ke Lie Uchit Samay

भजन सिमरन के लिए उचित समय

संत सतगुरु द्वारा भजन सिमरन के लिए अमृत वेले का उचित समय सुबह 3:00 से 5:30 बजे का होता हैं। क्योंकि अमृत का मतलब होता हैं रस और वेले का अर्थ हैं घड़ी व समय। यानि ये समय (3:00 से 5:30) ऐसा होता हैं जिस समय हमें सांसारिक कोई भी काम काज नहीं होता हैं और हर जगह शांति होती हैं और हमारा मन भी […]

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2101, 2017

Vikaaron Par Niyantran Hetu

विकारों पर नियंत्रण हेतु

अपने में जो कमजोरी है, जो भी दोष हैं उस कमजोरी को, उन दोषों को निम्न मंत्र द्वारा स्वाहा कर दो। दोषों को याद करके मंत्र के द्वारा मन-ही-मन उनकी आहुति दे डालो, उन्हें स्वाहा कर दो।

मंत्र: ॐ अहं तं जुहोमि स्वाहा। ‘तं’ की जगह पर विकार या दोष का नाम लें।
जैसे: ॐ अहं वृथावाणीं जुहोमि स्वाहा।
ॐ अहं कामविकार’ जुहोमि स्वाहा।
ॐ अहं चिन्तादोषं जुहोमि स्वाहा।

जो विकार तुम्हें […]

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2101, 2017

Thaakur Shree Madan Mohan Jee Aur Gujaree Ka Prem

ठाकुर श्री मदन मोहन जी और गूजरी का प्रेम

एक गूजरी रोजाना मदन मोहन जी करौली वालो के मदिर मे दूध देने आया करती थी। लोभवश वह दूध मे पानी मिलाया करती थी। किनतु मदन मोहन जी का उस गूजरी का आपस मे बडा पे्म था। एक दिन गूजरी ने दूध मे किसी बावडी का पानी मिलाया और भागयवश उसमे मछली आ गई। जब गुसॉई जी ने मछली देखी तो गूजरी […]

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