अष्टविनायक यात्रा / Ashtavinayak Yatra

अष्टविनायक से अभिप्राय है- “आठ गणपति”। इस शब्द का उपयोग संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य में फैले हुए आठ मंदिरों की जानी मानी तीर्थयात्रा का वर्णन करने के लिए किया जाता है। भगवान गणेश के आठों शक्तिपीठ महाराष्ट्र में ही स्तिथ है । ये दैत्य प्रवृत्तियों के उन्मूलन हेतु उसी प्रकार के ईश्वरीय अवतार हैं, जिस प्रकार श्रीराम एवं श्रीकृष्ण के थे। Read more

मयूरेश्वर विनायक / Mayureshwar Vinayak

मयूरेश्वर या ‘मोरेश्वर’ भगवान गणेश के ‘अष्टविनायक’ मंदिरों में से एक है। यह मंदिर महाराष्ट्र राज्य के मोरगाँव में करहा नदी के किनारे अवस्थित है जो पुणे जिले के अंतर्गत आता है।। मोरगाँव का नाम मोर के नाम पर पड़ा क्योंकि एक समय ऐसा था जब यह गाँव मोरों से भरा हुआ था। मोरगाँव, पुणे में बारामती तालुका में स्थित है। यह क्षेत्र भूस्वानंद के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ होता है- “सुख समृद्ध भूमि”। इस क्षेत्र का ‘मोर’ नाम इसीलिए पड़ा, क्योंकि यह मोर के समान आकार लिए हुए है। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में बीते काल में बडी संख्या में मोर पाए जाते थे। इस कारण भी इस क्षेत्र का नाम मोरगाँव प्रसिद्ध हुआ। Read more

सिद्धिविनायक / Siddhivinayak

सिद्घिविनायक गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। गणेश जी जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है, वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्घिविनायक मंदिर कहलाते हैं। कहते हैं कि सिद्धि विनायक की महिमा अपरंपार है, वे भक्तों की मनोकामना को तुरंत पूरा करते हैं। मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं। Read more

बल्लालेश्वर विनायक / Ballaleshwar Ganpati

बल्लालेश्वर रायगढ़ ज़िला, महाराष्ट्र के पाली गाँव में स्थित भगवान गणेश के ‘अष्टविनायक’ शक्ति पीठों में से एक है। ये एकमात्र ऐसे गणपति हैं, जो धोती-कुर्ता जैसे वस्त्र धारण किये हुए हैं, क्योंकि उन्होंने अपने भक्त बल्लाल को ब्राह्मण के रूप में दर्शन दिए थे। इस अष्टविनायक की महिमा का बखान ‘मुद्गल पुराण’ में भी किया गया है। ऐसी मान्यता है कि बल्लाल नाम के एक व्यक्ति की भक्तिसे प्रसन्न होकर भगवान गणेश उसी मूर्ति में विराजमान हो गए, जिसकी पूजा बल्लाल किया करता था। अष्टविनायकों में बल्लालेश्वर ही भगवान गणेश का वह रूप है, जो भक्त के नाम से जाना जाता है। Read more

वरदविनायक / Varadvinayak

श्री वरदविनायक- अष्ट विनायक में चौथे गणेश हैं श्री वरदविनायक। वरदविनायक देवताओं में प्रथम पूजनीय भगवान श्री गणेश का ही एक रूप है। वरदविनायक जी का मंदिर गणेश जी के आठ पीठों में से एक है, जो महाराष्ट्र राज्य में रायगढ़ ज़िले के कोल्हापुर तालुका में एक सुन्दर पर्वतीय गाँव महाड में स्थित है। इस मंदिर में नंददीप नाम का एक दीपक है जो कई वर्षों में प्रज्जवलित है। वरदविनायक का नाम लेने मात्र से ही सारी कामनाओं को पूरा होने का वरदान प्राप्त होता है। Read more

चिंतामणी विनायक / Chintamani Vinayak

अष्टविनायक में पांचवें गणेश हैं चिंतामणि गणपति। चिंतामणी का मंदिर महाराष्ट्र राज्य में पुणे ज़िले के हवेली तालुका में थेऊर नामक गाँव में है। भगवानगणेश का यह मंदिर महाराष्ट्र में उनके आठ पीठों में से एक है। यहाँ गणेश जी ‘चिंतामणी’ के नाम से प्रसिद्ध हैं, जिसका अर्थ है कि “यह गणेश सारी चिंताओं को हर लेते हैं और मन को शांति प्रदान करते हैं”। मंदिर के पास ही तीन नदियों का संगम है। ये तीन नदियां हैं भीम, मुला और मुथा। यदि किसी भक्त का मन बहुत विचलित है और जीवन में दुख ही दुख प्राप्त हो रहे हैं तो इस मंदिर में आने पर ये सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि स्वयं भगवान ब्रहमा ने अपने विचलित मन को वश में करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। Read more

श्री गिरजात्मज विनायक / Girijatmaj Vinayak

गिरजात्मज का अर्थ है गिरिजा यानी माता पार्वती के पुत्र गणेश। यह माना जाता हैं की यहाँ जिस जगह गणेशजी बिराजमान हैं वहा पार्वतीजीने तपस्या की थी इसीलिये इस गणेश का नाम गिरजा का (पार्वती का) आत्मज (पुत्र) यानिकी गिरजामत है । यह एक पहाड़ पर है और बौद्ध गुफाओं के स्थान पर बनाया गया है । एक मात्र मंदिर है भगवान गणेश गिरिजात्माजा के रूप में पूजा जाता है । लेनयादरी पहाड़ पर 18 बौद्ध गुफाओं में से 8वीं गुफा में गिरजात्मज विनायक मंदिर है । इन गुफाओं को गणेश गुफा कहा जाता है। Read more

विघ्नेश्वर/विघ्नहर विनायक / Vigneshwara Vinayaka

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर-अष्टविनायक में सातवें गणेश हैं विघ्नेश्वर गणपति। विघ्नेश्वर गणेश मंदिर पुणे-नासिक हाइवे पर ओझर जिले में जूनर क्षेत्र में स्थित है। यह पुणे-नासिक रोड पर नारायणगावं से जूनर या ओझर होकर करीब 85 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह मंदिर कुकड़ी नदीके किनारे पर स्थित हैं। वाया मुंबई – ठाणे – कल्याण – बापसी -सराल्गाव – ओतूर- ओज़र १८२ किमी दूर है। यह मंदिर चारो और से उंची पत्थरकी दिवारोसे घिरा हैं और इसका शिखर सोनेका बना हैं। यहाँ एक दीपमाला भी है, जिसके पास द्वारपालक हैं। Read more

महागणपति / Mahaganapati

भगवान श्री गणेश जी के सभी आठ प्रमुख मंदिरों में से एक महागणपति जी का मंदिर भी है। यह मंदिर पुणे के रांजणगांव में स्थित है। श्री महागणपति जी का मंदिर पुणे अहमदनगर राजमार्ग पर 50 किलोमीटर की दूरी पर है। महागणपति जी मंदिर का इतिहास 9वीं व 10वीं सदी के बीच का जाना जाता है। महागणपति जी के मंदिर का प्रवेश द्वार कि बहुत विशाल और सुन्दर है। भगवान श्री गणपति की मूर्ति को माहोतक नाम से भी जाना जाता है क्योंकि भगवान श्री गणपति जी की मूर्ति के 10 सूंड़ और 20 हाथ हैं। प्रचलित मान्यता है कि मंदिर की मूल मूर्ति तहखाने में की छिपी हुई है। Read more