मनोहर बाल लीला

यशोदा मैया गोपियों का उलाहना सुन सुन कर झुँझलाती हुई कहती हैं
परीं सब बैर हमारे लाल।
हम पूछति छींके पै कैसे, पहुँचि सकत गोपाल।
सुनु येहि छोट जान जनि मैया, बडो होत तत्काल।
सुनु मैया!इक काल अनेकन, रूप धरत यह बाल।
भोरी मातु ‘कृपालु’ न जानति, मायापति को जाल।

श्री कृष्ण शरणम ममः