303, 2017

Ishwar Ka Koi Karya Yuhi Ya Vyarth Mein Hi Nahi Hota

ईशवर का कोई कार्य युहीं या व्यर्य में ही नहीं होता

चक्रवती भरत के जीवन की एक घटना है कि, एक दिन विप्र देव ने उनसे पूछा- महाराज आप वैरागी है तो महल में क्यों रहते हैं? आप महल में रहते हैं तो वैरागी कैसे? मोह, माया, विकार, वासना के मध्य आप किस तरह के वैरागी है? क्या आपके मन में कोई मोह, पाप, विकार और वासना के कोई भाव नही […]

Read More

2702, 2017

Mathura Vrindavan Barsana And Duaji Holi Festival 2017 Dates

मित्रों ब्रज की विश्व व्यख्यात् लठामार होली का ढाडा 1 फरवरी ( बसंत पंचमी ) 2017 को गढ गया है। 1 फरवरी यानि बसंत पंचमी से पुर ब्रज में होली महोत्सव शुरू हो चुका है। ब्रज के समस्त मन्दिरों में और ब्रज के गाँवों में व समस्त ब्रज में होली का रंग बरसना शुरू हो चुका है। पुरे विश्व में होली की शुरूआत ब्रज के बाबा बृषभानु के निज गाँव […]

Read More

2602, 2017

Kya Hamare Kanhaiya Koi Jadu Tona Janate Hain

क्या हमारे कन्हैया कोई जादू टोना जानते हैं

“दाऊ भैया आपको ज्ञात है, क्या हमारे कन्हैया कोई जादू टोना जानते हैं। इनकी ओर सब इतने आकर्षित क्यों रहतें हैं?” कन्हैया के मित्र मनसुखा ने श्री कृष्ण को स्नेह भरी दृष्टि से निहारते हुये अति कौतुहल से पूछा। “नहीं मनसुखा जादू टोना नहीं, इस नटखट कन्हैया के पास कोई विद्या है जिससे यह सबका मन मोह लेता है”- बलराम जी ने अपने […]

Read More

2602, 2017

Dhan Ka Vyarth Sanchay Na Karo

धन का व्यर्थ संचय न करो

किसी नगर में एक धनवान व्यक्ति रहता था। उसके पास अपार भू-सम्पति थी। परंतु वह बेहद कंजूस था। पदार्थों में सबसे कीमती पदार्थ सोना तो उसे बेहद प्रिय था। सोने की यह प्यास उसमें इतनी बढ़ी कि उसने अपनी जमीन जायदाद बेचकर सोने के सिक्के खरीद लिए। उसने सभी सोने के सिक्कों को एक संदूक में भर लिया। इसके बाद रात के अंधेरे में उसने […]

Read More

1602, 2017

Man Ka Anand Antarik Saundary

मन का आंनद आंतरिक सौन्दर्य

एक बार इंद्र अपने दरबार में सभी देवताओं के साथ बैठे पृथ्वी की स्थिति पर चर्चा कर रहे थे। पृथ्वी के जीवन, वहां की समस्यओं व मांगों के विषय में सभी अपने अपने विचार रख रहे थे। इंद्र का आग्रह था कि पृथ्वी के जीवन के विषय में उन्हें सही विषयवस्तु का ज्ञान हो जाए तो वे सुधार की दिशा में कुछ सकारात्मक कदम उठाएं। देवताओं […]

Read More

1002, 2017

Karma Bai Ka Prem

कर्मा बाई का प्रेम
कर्मा बाई जी कोई भी काम करते समय भगवान के नामो का उच्चारण करती रहती थी। उनका हर काम भगवान के लिए ही होता था। वे यदि कंडे भी थापती थी तो भी भगवान का गान करती रहती थी। एक बार उनके कंडे किसी ने चोरी कर लिए, ये जानकर उन्हें बड़ा दुःख हुआ। तब किसी ने कहा – हम घर घर जाकर लोगो से पूँछेगे, हम […]

Read More

502, 2017

Moksh Ka Adhikari Kaun

मोक्ष का अधिकारी कौन

ब्रह्माजी के कुल में एक बड़े ही धर्मात्मा और दानी राजा का जन्म हुआ। उनका नाम वसु था। वसु जहां से भी सम्भव हो ज्ञान इकट्ठा करते रहते थे इसलिये अपने ज्ञान और जानकारी के लिए भी बहुत प्रसिद्ध थे। एक दिन वसु ब्रह्माजी से मिलने पहुंचे। ब्रह्माजी के भवन में देवों की सभा चल रही है। इतने में रैभ्य मुनि आ वहां गए। रैभ्य देवगुरू वृह्स्पति […]

Read More

202, 2017

Thakur Ji Ki Kripa

ठाकुर जी की कृपा

सर्वकाल ठाकुर की मेरे ऊपर बड़ी कृपा है –

मात्र यही मन को शान्त करता है पैर मे जूता होने पर काँटे के ऊपर पैर रखने वाले को मालूम है कि मुझे तो कुछ होने वाला नही है , परंतु उससे कहा जाय फूल पर पैर रखने के लिये , तो हो सकता है वो पैर न रख सके ।

घर के लोग फूल जैसे हों – […]

Read More

2901, 2017

Bhagavaan Ka Mitr Hona Bhee Atyant Durlabh Hai

भगवान का मित्र होना भी अत्यन्त दुर्लभ है।

सूरदासजी ने एक पद में खेल के प्रसंग का बहुत ही सुन्दर वर्णन किया है जिसमें श्रीकृष्ण हार जाते हैं और श्रीदामा जीत जाते हैं। पर श्रीकृष्ण दांव देना नहीं चाहते और खेलना भी चाहते हैं तब श्रीदामा कहते हैं कि:- खेलते समय क्यों गुस्सा करते हो, तुम हमसे जाति में तो बड़े नहीं हो न ही हम तुम्हारे घर में रहते हैं। […]

Read More

2601, 2017

Jab Tak Vo Deta Rahega Tab Tak Main Bhee Deta Rahunga

जब तक वो देता रहेगा, तब तक मैं भी देता रहुँगा।

एक बार एक सत्संग के बाद , गुरुजी एक कतार में खड़े लोगों को प्रसाद बाँट रहे थे। एक छोटा लड़का गुरुजी तक भाग के गया और गुरुजी ने वह छोटे लड़के को प्रसाद दिया। लड़का प्रसाद लेकर भाग गया और फिर गुरुजी के पास गया और गुरुजीने उसे प्रसाद फिर से दिया। पूर्ण उत्साह के साथ, लड़का वापस गुरुजी […]

Read More

2101, 2017

Bhajan Simaran Ke Lie Uchit Samay

भजन सिमरन के लिए उचित समय

संत सतगुरु द्वारा भजन सिमरन के लिए अमृत वेले का उचित समय सुबह 3:00 से 5:30 बजे का होता हैं। क्योंकि अमृत का मतलब होता हैं रस और वेले का अर्थ हैं घड़ी व समय। यानि ये समय (3:00 से 5:30) ऐसा होता हैं जिस समय हमें सांसारिक कोई भी काम काज नहीं होता हैं और हर जगह शांति होती हैं और हमारा मन भी […]

Read More

2101, 2017

Vikaaron Par Niyantran Hetu

विकारों पर नियंत्रण हेतु

अपने में जो कमजोरी है, जो भी दोष हैं उस कमजोरी को, उन दोषों को निम्न मंत्र द्वारा स्वाहा कर दो। दोषों को याद करके मंत्र के द्वारा मन-ही-मन उनकी आहुति दे डालो, उन्हें स्वाहा कर दो।

मंत्र: ॐ अहं तं जुहोमि स्वाहा। ‘तं’ की जगह पर विकार या दोष का नाम लें।
जैसे: ॐ अहं वृथावाणीं जुहोमि स्वाहा।
ॐ अहं कामविकार’ जुहोमि स्वाहा।
ॐ अहं चिन्तादोषं जुहोमि स्वाहा।

जो विकार तुम्हें […]

Read More

2101, 2017

Thaakur Shree Madan Mohan Jee Aur Gujaree Ka Prem

ठाकुर श्री मदन मोहन जी और गूजरी का प्रेम

एक गूजरी रोजाना मदन मोहन जी करौली वालो के मदिर मे दूध देने आया करती थी। लोभवश वह दूध मे पानी मिलाया करती थी। किनतु मदन मोहन जी का उस गूजरी का आपस मे बडा पे्म था। एक दिन गूजरी ने दूध मे किसी बावडी का पानी मिलाया और भागयवश उसमे मछली आ गई। जब गुसॉई जी ने मछली देखी तो गूजरी […]

Read More

2101, 2017

Kaise Hua Hanumaan Jee Ka Janum

कैसे हुआ हनुमान जी का जन्म

पुराणों की कथानुसार हनुमान की माता अंजना संतान सुख से वंचित थी। कई जतन करने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इस दुःख से पीड़ित अंजना मतंग ऋषि के पास गईं, तब मंतग ऋषि ने उनसे कहा-पप्पा सरोवर के पूर्व में एक नरसिंहा आश्रम है, उसकी दक्षिण दिशा में नारायण पर्वत पर स्वामी तीर्थ है वहां जाकर उसमें स्नान करके, बारह वर्ष तक […]

Read More

2101, 2017

Man Maakhan Kaise Ho Krishna Leela Maadhury

मन माखन कैसे हो कृष्णा लीला माधुर्य

ऐसा क्या था गोपियों के पास कि कृष्ण स्वयं बिना बुलाए,उनके मन का काम (गोपियाँ चाहती थी कि हमारे घर आकर चोरी करे )कर देते थे। वास्तव में देखा जाए तो गोपियों ने अपने चित्त को माखन बनाया था,और उनके चित्त रूपी माखन को ही भगवान चुराते थे। सबसे पहले जानते है कि माखन बनता कैसे है। ये जानना अति आवश्यक हे सबसे पहले […]

Read More

2101, 2017

Maharshi Vashishth Ka Krodh

महर्षि वशिष्ठ का क्रोध

एक बार आप, ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभाष आदि अष्ट वसु अपनी पत्नियों के साथ महर्षि वशिष्ठ के आश्रम के समीप घूम रहे थे। प्रभाष की पत्नी की नजर आश्रम में कामधेनु गाय पर पड़ी, वह कामधेनु को देखकर ललचा गईं। उन्होंने अपने पति से कहा कि आप स्वयं वसु है, ऐसी दिव्य गाय का किसी मुनि के पास क्या काम, मुझे यह गाय […]

Read More

2101, 2017

Mahaadev Ke Kotavaal Hain Bhairavanaath

महादेव के कोतवाल हैं भैरवनाथ

बाबा विश्वनाथ देवाधिदेव महादेव हैं, तो भैरवनाथ उनके सबसे प्रिय अनुचर हैं। जो असंख्य शिवभक्तों और गणों की व्यवस्था संभालते हैं। बिना उनके अनुग्रह के कोई महादेव के पास भी नहीं पहुंच सकता। भैरव बाबा ही भोलेनाथ की प्रिय काशी नगरी के कोतवाल की व्यवस्था संभालते हैं। काशी में भैरवनाथ के दर्शन किए बिना बाबा विश्वनाथ के दर्शन अधूरे माने जाते हैं। भैरवनाथ भगवान शिव के […]

Read More

2101, 2017

Eeshvar Hamaare Ho Gae To

ईश्वर हमारे हो गए तो

एक नगर के राजा ने यह घोषणा करवा दी कि कल जब मेरे महल का मुख्य दरवाज़ा खोला जायेगा। तब जिस व्यक्ति ने जिस वस्तु को हाथ लगा दिया वह वस्तु उसकी हो जाएगी। इस घोषणा को सुनकर सब लोग आपस में बातचीत करने लगे कि मैं अमुक वस्तु को हाथ लगाऊंगा। कुछ लोग कहने लगे मैं तो स्वर्ण को हाथ लगाऊंगा, कुछ लोग कहने लगे […]

Read More

2101, 2017

Pyaar Ka Anand

प्यार का आनन्द

एक तितली मायूस सी बैठी हुई थी। पास ही से एक और तितली उड़ती हुई आई। उसे उदास देखकर रुक गई और बोली – क्या हुआ ? उदास क्यों इतनी लग रही हो ?
वह बोली – मैं एक फूल के पास रोज जाती थी। हमारी आपस में बहुत दोस्ती थी। बड़ा प्रेम था। पर अब उसके पास समय ही नहीं है मेरे लिए। वह तो बहुत व्यस्त […]

Read More

2101, 2017

Sau Oonto Kee Kahaanee

सौ ऊंटो की कहानी

किसी शहर में, एक आदमी प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था। वो अपनी ज़िन्दगी से खुश नहीं था , हर समय वो किसी न किसी समस्या से परेशान रहता था। एक बार शहर से कुछ दूरी पर एक महात्मा का काफिला रुका . शहर में चारों और उन्ही की चर्चा थी। बहुत से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुँचने लगे , उस आदमी ने भी महात्मा […]

Read More